मैंने बहुत सताया है
-अंजनी कुमार पाठक
दीनहीन दलितों को मैंने बहुत सताया है
इनसे लड़कर उनसे भिड़कर
मैंने महल बनाया है
वाद मुकदमें झेल झेलकर
जीवन को बर्बाद किया
मरघट -सा सूनापन लगता
मैंने जो महल बनाया है
जीवन संघर्ष है कठिन डगर है
अवसर ऐसे भी आते हैं
आग लगी हो किसी महल में
सबने इसे बुझाया है
सुख में तेरे साथ खड़े थे
दुख में सब कतराते हैं
मिलजुलकर रहना जो सीखा
जीवन सफल बनाया है।
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