Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
Administrator

मैंने बहुत सताया है

 

मैंने बहुत  सताया है

-अंजनी कुमार पाठक


दीनहीन दलितों को मैंने बहुत  सताया है

इनसे लड़कर  उनसे भिड़कर 

मैंने महल बनाया है

वाद मुकदमें झेल झेलकर 

जीवन  को बर्बाद किया

मरघट -सा सूनापन  लगता 

मैंने जो महल बनाया है

जीवन  संघर्ष  है कठिन डगर है

अवसर ऐसे भी आते हैं

आग लगी हो किसी महल में

सबने इसे बुझाया है

सुख में तेरे साथ  खड़े  थे

दुख में सब कतराते हैं

मिलजुलकर रहना जो सीखा

जीवन  सफल बनाया है।

 


Powered by Froala Editor

LEAVE A REPLY
हर उत्सव के अवसर पर उपयुक्त रचनाएँ