कुछ कहते हैं करते हैं कुछ !
अंजनी कुमार पाठक
कुछ कहते हैं करते हैं कुछ
ऐसे लोग भी होते हैं
जो देते दूजे को धोखा
चैन की नींद ना सोते हैं
संस्कार बिगड़ता है नर का
इसका उसे परवाह नहीं
भला किया ना किसी नर का ये
स्वार्थ में डूबे रहते हैं
नभ में चहकती चिड़ियों का
ना अपना कोई ठिकाना है
कटु सत्य है जीव जगत का
जैसे तैसे जी लेते हैं
हर दुख को जिसने झेला है
जीने का है एहसास उसे
जो मेरा है किसी और का था ये
जीवन संगीत बदलते हैं
त्यागी तपस्वी अनुरागी नहीं
वो प्रेम की भाषा क्या जाने ?
राहु केतु संग शनिदेव भी
अग्नि परीक्षा लेते हैं।
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