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हे मां जग कल्याण करो!

 

हे मां जग कल्याण  करो!

अंजनी कुमार पाठक


हे मां जग कल्याण  करो!

कलुषभाव नर में है रहता

स्वार्थ  भाव अविरल है बहता

मानवता का भाव  गौण है

करूणाभाव भरो !

हे मां जग कल्याण  करो!

मां ही ममता मां ही शक्ति

मां से मिलती ज्ञान  की ज्योति

शांति प्रेम दया हो नर में

श्रद्धाभाव भरो!

हे मां जग कल्याण करो !

सूर्य  समान उदार  बने नर

जीव जगत  से प्यार  करे नर

मान सम्मान  मिले हर नर को

प्रखर बुद्धी भरो !

हे मां जग कल्याण  करो!

 


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