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दफ़्तर का एक किरानी

 

दफ़्तर  का एक किरानी


अंजनी कुमार पाठक


दफ़्तर  का एक किरानी पैसे से सुनता है

पैसा ना दिया तो हर काम अटकता है

दफ़्तर  की कुर्सी पर रहता है कम

चाय की दूकान  पर मिल जाता हरदम

लेन-देन  का सारा मसला यही पर सलटता है

दफ़्तर  का एक किरानी पैसे से सुनता है

दफ़्तर  की स्थिति है बद से बदतर

किरानी को लगता है ना कोई डर

संचिका को लम्बित  रखकर जी भरके लूटता है

दफ़्तर  का एक किरानी पैसे से सुनता है

भ्रष्ट  व्यवस्था का है सरासर दोष

पैसा से मिलता है मलाईदार  पोस्ट 

जो भी कमाई  होती आपस में बंटता है

दफ़्तर  का एक किरानी पैसे से सुनता है

भ्रष्ट  व्यवस्था का अंजनी करता है पर्दाफाश 

कवि पत्रकार  भी बरसाते रहते हैं आग

पहुंच  पैरवी किरानी का ऐसा

ना कुछ  भी बिगड़ता है

दफ़्तर  का एक किरानी पैसे से सुनता है


 


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