आओ दीप जलाएं
घर आंगन से दिग्दिगंत तक
देवालय से मन मंदिर तक
तम को दूर भगाएं
आओ दीप जलाएं।
खुशियों का त्योहार दिवाली
घर घर में लाये खुशियाली
श्रद्धा भक्ति और भाव का उत्सव
ईर्ष्या जलन भगाएं
आओ दीप जलाएं।
दीप से दीप जले हर घर में
अटूट प्रेम रहे हर नर में
सुख संपदा बहता पानी
मन का मैल मिटाएं
आओ दीप जलाएं।
एक एक दीप जले वीरों पर
प्राण उत्सर्ग जो किये वतन पर
अमर रहे उनकी यह कृति
राष्ट्र धर्म अपनाएं
आओ दीप जलाएं।
अंजनी कुमार पाठक
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