बरसात ????️????️????
काले-काले बादल छाए हैं,
संग अपने सौगात लाए हैं।
कहीं खुशी की फुहारें लेकर,
कहीं आँखों में बरसात लाए हैं।
धरती की सूखी गोद में,
जब पहली बूंदें गिरती हैं,
मिट्टी की भीनी-भीनी खुशबू
हर दिल की पीड़ा हरती है।
खेतों में हरियाली आती,
किसान के चेहरे मुस्काते हैं,
वर्षों की सूनी आशाओं में
नए सपने फिर जग जाते हैं।
पर इस बारिश का एक चेहरा
आँखों को नम कर जाता है,
कच्चे घर की टूटी छत से
जब पानी टप-टप आता है।
कोई बच्चे बारिश में हँसते,
कागज़ की नाव चलाते हैं,
तो कोई निर्धन माँ अपने
भीगे आँचल को सुखाते हैं।
बरसात हमें यह कहती है,
जीवन केवल उत्सव नहीं,
दूसरों के दुःख को समझो,
मानवता से बढ़कर कुछ नहीं।
आओ ऐसा समाज बनाएँ,
जहाँ हर मन में प्यार रहे,
किसी गरीब की आँखों में
कभी न आँसुओं की धार बहे।
बरसे पानी खेत-खलिहानों में,
बरसे खुशियाँ हर द्वार,
धरती के साथ-साथ अब तो
इंसानियत भी हो साकार।
लेखिका - अनिता देवी शिक्षिका
जिला पूर्वी चंपारण बिहार
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