आख़िर वो कौन थे
आख़िर वो कौन थे, जिनके कारण
एक दिन पराधीन हम सब बने
जब ज्ञान के दीप बुझा दिए गए,
और प्रश्न पूछना अपराध ठहरे।
जब गुरुकुल सूने कर दिए गए,
और पुस्तकों पर पहरे बैठे,
जब शिक्षा का अर्थ सीमित हुआ,
और विवेक के पंख कटे।
वो तलवार नहीं थे,
जो हमें हराने आए,
वो अज्ञान था
जिसे हमने पाल लिया,
और सच को पढ़ना छोड़ दिया।
जब अक्षर बिकने लगे बाजारों में,
और शिक्षा व्यापार बन गई,
तब चेतना सो गई समाज की,
और आज़ादी काग़ज़ बन गई।
पराधीनता बाहर से नहीं आई,
वो कक्षा-कक्ष में जन्मी,
जहाँ सोचने से रोका गया,
और रटने की आदत पनपी।
आज शिक्षा से प्रश्न है मेरा
क्या तुम हमें मुक्त करोगी?
या डिग्रियों के बोझ तले
फिर कोई ज़ंजीर रचोगी?
जागो शिक्षक, जागो विद्यार्थी,
ज्ञान ही सच्चा शस्त्र है,
क्योंकि जब शिक्षा स्वतंत्र होती है,
तभी राष्ट्र स्वतंत्र होता है। ????
लेखक -अनिता देवी शिक्षिका -जिला पूर्वी चंपारण बिहा
Powered by Froala Editor

LEAVE A REPLY