Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
Administrator

विश्व पुस्तक दिवस पर कविता

 

विश्व पुस्तक दिवस पर कविता

किताबें हैं ज्ञान की दीपशिखा,
अंधेरों में राह दिखाती हैं,
हर पन्ने में छिपा हुआ संसार,
चुपचाप हमें समझाती हैं।

कभी माँ की ममता बन जातीं,
कभी गुरु का उपदेश सुनातीं,
शब्दों के इन कोमल स्पर्श से,
जीवन की दिशा बतातीं।

जब मन थककर हार जाता है,
कोई अपना साथ नहीं देता,
तब ये पुस्तकें बाहें खोल,
मौन में भी प्यार हैं देतीं।

इनमें इतिहास की गाथाएं,
और भविष्य के सपने बसते,
हर अक्षर में आशा की किरण,
हर पंक्ति में विश्वास हैं हँसते।

आओ आज ये प्रण करें हम,
किताबों से नाता जोड़ेंगे,
ज्ञान के इस अमृत सागर में,
हर दिन डूबकर कुछ सीखेंगे।

क्योंकि किताबें ही सच्ची मित्र,
न कभी बदलती, न दूर जातीं,
जीवन के हर मोड़ पर ये,
हाथ थामे साथ निभातीं। ????

लेखिका अनीता देवी जिला पूर्वी चंपारण बिहार

Powered by Froala Editor

LEAVE A REPLY
हर उत्सव के अवसर पर उपयुक्त रचनाएँ