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हिंदी मेरी माँ है

 

हिंदी मेरी माँ है

— डॉ. अनीता देवी, शिक्षिका


हिंदी मेरी माँ है

हिंदी मेरी माँ जैसी,

हिंदी मेरा मान है,

इसके मीठे शब्दों में,

बसता हिंदुस्तान है।


माँ की पहली बोली हिंदी,

आँखों का अरमान है,

दादी की प्यारी कहानी,

बचपन की मुस्कान है।


माटी की खुशबू हिंदी में,

गाँवों की पहचान है,

भारत की संस्कृति का,

यह अनुपम सम्मान है।


हिंदी केवल शब्द नहीं है,

यह दिल की आवाज़ है,

टूटे मन को जोड़ सके जो,

ऐसी इसकी मिठास है।


आओ मिलकर आज शपथ लें,

हिंदी का सम्मान करें,

अपने घर और विद्यालय में,

हिंदी मेरी माँ है


हिंदी मेरी माँ है

हिंदी मेरी माँ जैसी,

हिंदी मेरा मान है,

इसके मीठे शब्दों में,

बसता हिंदुस्तान है।


माँ की पहली बोली हिंदी,

आँखों का अरमान है,

दादी की प्यारी कहानी,

बचपन की मुस्कान है।


माटी की खुशबू हिंदी में,

गाँवों की पहचान है,

भारत की संस्कृति का,

यह अनुपम सम्मान है।


हिंदी केवल शब्द नहीं है,

यह दिल की आवाज़ है,

टूटे मन को जोड़ सके जो,

ऐसी इसकी मिठास है।


आओ मिलकर आज शपथ लें,

हिंदी का सम्मान करें,

अपने घर और विद्यालय में,

हिंदी का गुणगान करें।


जब तक धड़कन दिल में होगी,

हिंदी का अभिमान रहेगा,

भारत माँ की पावन धरती पर,

हिंदी का सम्मान रहेगा।

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