रात भर
चाह से चाहतों के सफ़र में दिल रहा,
कामना कसमसाती रही रात भर।
शबनमी एहसास से मन भीगता रहा,
धड़कनें गुनगुनाती रही रात भर।
पलकों के पालने में बिठा आपको,
नेह डोरी झुलाती रही रात भर।
सो पाया नहीं एक क्षण के लिए,
आपकी याद आती रही रात भर।
©अमरेश सिंह भदौरिया
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