जब हृदय बोझिल हुआ आँखें सजल हो गई।
मुस्कराये लफ़्ज़ तो फिर ताज़ा ग़ज़ल हो गई।
किसी को खुशियाँ मिली कोई हुआ गमज़दा,
कोई डूबा सोच में और किसी से पहल हो गई।
©अमरेश सिंह भदौरिया
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