आपको मैं अपनी जागीर समझ बैठा।
हाथ की रेखाओं में तक़दीर समझ बैठा।
खुद बन सका हूँ रांझा ये नहीं जानता,
पर आपको मैं अपनी हीर समझ बैठा।
©अमरेश सिंह भदौरिया
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