वक्त की आँच में हर शिकायत जले,
प्यार के रंग में आज दुनिया ढले,
फागुन की मस्ती में ऐसा रँगे हम—
कि सदियाँ बीतें पर ये रंग न ढले।
द्वेष की लकड़ियाँ मन से चुन लीजिए,
नेह की अनसुनी धुन को सुन लीजिए,
राख हो जाए कल की कड़वाहटें—
आज खुशियों का दामन ही बुन लीजिए।
चेहरे बदल गए पर मिज़ाज वही है,
बीत गए मौसम पर साज़ वही है,
गुलाल की परतें तो धुल गईं कब की—
पर रूह पे चढ़ा जो, वो अंदाज़ वही है।
मेरी ओर से आपको और आपके परिवार को होली की अनंत शुभकामनाएँ!
—अमरेश सिंह भदौरिया
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