करवा चौथ— प्रेम का अनुष्ठान
अमरेश सिंह भदौरिया
करवा चौथ हमारे समाज में केवल एक व्रत नहीं, बल्कि स्त्री की श्रद्धा, विश्वास और प्रेम का अद्भुत प्रतीक है। यह वह दिन है जब नारी अपने जीवनसाथी की मंगलकामना के लिए पूरे दिन उपवास रखकर चाँद की प्रतीक्षा करती है। उस क्षण जब वह चाँद को छलनी से देखती है, उसकी आँखों में आस्था की ज्योति और मन में प्रेम की प्रार्थना साथ-साथ झिलमिलाने लगती है।
इस पर्व का सबसे सुंदर पक्ष यही है कि इसमें कोई बाहरी दिखावा नहीं, बल्कि अंतरंग समर्पण की अनुभूति है। यह व्रत नारी की उस शक्ति का परिचायक है, जो अपने जीवन के हर कष्ट को मुस्कान में बदल देती है।
करवा चौथ हमें यह सिखाता है कि प्रेम का अर्थ केवल साथ रहना नहीं, बल्कि एक-दूसरे के जीवन में शुभेच्छा और विश्वास के दीप जलाए रखना भी है। यही आस्था, यही निष्ठा भारतीय संस्कृति की आत्मा है।
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