ऋतुपति कि माया को देखो मातम से अधियाँर मेँ ...
बना डाला बूँदो को मोती बिजली के उजियार मेँ ।।
चाँद खडा सब देख रहा है, मेघो के पीछवाड से ....
शायद डर जाता अब भी वह ऋतुपति कि दहाड से।।
झीलो कि मुस्कान को देखो , बूँदो के अभिमान से...
समझ लिया विज्ञान इसे अब तरंग के सिद्धान्त से।।
सूरज ने थी जलन बिखेरी ,जलज के प्रतिकार मेँ...
तभी तो थी यह इन्द्र की लीला"अम्बुज"(कमल)के अधिकार मेँ।।
-- अम्बुज सिंह
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