मेरी आवाज
मेरा गला बैठा नहीं है
फिर भी मेरी आवाज
कुछ कम निकल रही है
मेरी आवाज
दबायी जा रही है
स्त्री हूँ न इसलिए
मुझसे मेरे बोलने का हक
लगभग छीना जा चुका है
मैँ बोलना चाहती हूँ
अपने हक के लिए लडना चाहती हूँ
कुछ करना चाहती हूँ
सबको दिखाना चाहती हूँ
कि मैँ भी कुछकर सकती हूँ
फिर भी
मेरी आवाज
पता नहीं क्यों
दबायी जा रही है
मेरी आवाज।
- अमन चाँदपुरी
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