जब हम किसी गुस्सा होते है
उसके दिल से आदर भाव खोते है
फिर अकेले मे रोते है
समझदार होकर क्यो गुस्सा होते है
खून जलने से क्या हासिल होता है
जो ना सच बात कहे वो बुझदिल होता है
चोट भी कभी कभी जब लग जाती है
तब गुस्से की हैवानियत जग जाती है
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