Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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ना सत्ता हिलती ना सिंहासन

 

ए आर आज़ाद

ना सत्ता हिलती ना सिंहासन हिलता
रहनुमाओं का ना कभी आसन हिलता

मर जाते कभी भूखे कभी बम खाकर
वोटर का ताबूत में कफ़न हिलता

रोते हैं बिलखते हैं अपनों के आंसू पे
नेता किसलिए हिलेंगे वतन हिलता

सबका दिल पसीज गया इस मंज़र से
लेना था फैसला पर ना जतन हिलता

सरकार ये मनमोहक ना कि 'मोहन' है
चुप हैं 'शाह' ना छप्पन का तन हिलता

कुछ एक सवाल है देश का रहनुमा से
पर तुम नहीं हर बार क्यों अपन हिलता

मारे जाएं शहरी और सत्ता गुम
हिलता देश का इक़बाल चलन हिलता


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