जकड़ लेती जिस तरह, जड़ों को मिटृटी खेत की,
गिरने नहीं देती वृक्ष को, धरा पर मिट्टी खेत की।
उसी तरह जकड़ा हुआ हूं, दुख सुख तकलीफ से,
बिखरने नहीं देती वुजूद, संस्कारों की मिट्टी खेत की।
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