लगाकर मुखौटे धोखा देने की तैयारी है, चेहरे पर चेहरे की साजिश मक्कारी है।
पीठ पीछे खंजर छिपाकर हाथ मिलाते,
सियासत की दोस्तो आज यही लाचारी है।
अ कीर्ति वर्द्धन
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