अंतरराष्ट्रीय वृद्ध दिवस पर
कभी युवा, कभी वृद्ध सम रहते हैं,
कभी मचाते शोर, शांत भी रहते हैं।
बच्चो संग बच्चा बनकर खेला करते,
कभी युवाओं संग, युवा बन रहते हैं।
नहीं उठाते बोझ, स्वयं ज्ञानी होने का,
नहीं जमाते रौब, घर में बुजुर्ग होने का।
धन दौलत अधिकार, बच्चों को सौंपे,
नहीं कोई अहंकार, हमें दानी होने का।
उम्र बढ़ी तो हमने भी इच्छाएँ सीमित कर ली,
पाचनक्रिया घटी तो भोजन सीमित कर ली।
बच्चे व्यस्त सभी काम में, छोटे अपनी शिक्षा,
मौज मस्ती की चाह, चाहत सीमित कर ली।
अ कीर्ति वर्द्धन
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