बूंद जब बरसी नेह की, फूल खिल गये,
प्यार से देखा जो उसने, दिल मिल गये।
ज्यों महकती प्यासी धरती, पहली बूंद से,
देखकर ही रूप उसका, होंठ सिल गये।
अ कीर्ति वर्द्धन
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