. मुझे आवाज उठाने दो
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मुझे आवाज उठाने दो
हाशिये से अब तो मुझे
मुख्य पटल पर आने दो ।
कब तक आंसू पीती रहूं ,
अब तो उसे बह जाने दो ।
अबला बनकर बहुत अत्यचार सहा,
अब तो बला बन जाने दो
मुझे आवाज उठाने दो ।
सीता सावित्री बहुत हुआ
अब तो काली कहलाने दो।
पुरुषों की पाशविकता से,
अब तो पिंड छुड़ाने दो
मुझे आवाज उठाने दो ।
नीची नजरों से ऊपर नजर
उठाने दो ।
अब दुनिया से नजर मिलाने दो
मुझे आवाज उठाने दो ।
कुछ नही कर सकते तो
इतना कर दो ,
माँ की कोख से कम से कम
बाहर तो आ जाने दो ।
मुझे आवाज उठाने दो ।
रेणु मिश्र
डॉ रेणु मिश्र
आरा,भोजपुर ( बिहार )
मो. 8210423678
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