Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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मुझे आवाज उठाने दो

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   मुझे आवाज उठाने दो 

   हाशिये से अब तो मुझे 

  मुख्य पटल पर आने दो ।

  कब तक आंसू पीती रहूं ,

  अब तो उसे बह जाने दो ।

  अबला बनकर बहुत अत्यचार सहा,

  अब तो बला बन जाने दो 

  मुझे आवाज उठाने दो ।

  सीता सावित्री बहुत हुआ 

  अब तो काली कहलाने दो।

  पुरुषों की पाशविकता से,

  अब तो पिंड छुड़ाने दो 

  मुझे आवाज उठाने दो ।

  नीची नजरों से ऊपर नजर  

   उठाने दो ।

 अब दुनिया से नजर मिलाने दो

 मुझे आवाज उठाने दो ।

 कुछ नही कर सकते तो

 इतना कर दो ,

 माँ की कोख से कम से कम

बाहर तो आ जाने दो ।

 मुझे आवाज उठाने दो ।


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