- डॉ त्रिलोक चंद फतेहपुरी
सुबह शाम नित्य नाम जपो
प्रकट सभी आभार करो
श्री राम की जय जयकार करो ।
वही चमन का माली है जो
नित नए सुमन खिलाता है
कई तरह के रंग भरता
डाली पर उन्हें सजाता है
वह खुशबू से महकाता है
उसका तुम दीदार करो !
श्री राम की जय जयकार करो ।
पाप पुण्य का धरती पर
उसने खेल रचाया है
धर्म कर्म की राह बता
आवागमन बनाया है
सबको यही समझाया है
तुम जीवों का उद्धार करो
श्री राम की जय जयकार करो।
मर्यादा में रह कर जिसने
जीने का ढंग बताया है
अहंकार को त्याग के जिसने
भेद व भाव मिटाया है
उस तीन लोक के स्वामी के
अस्तित्व को स्वीकार करो
श्री राम की जय जय कार करो।
हर साधक तपधारी की
वह कठिन परीक्षा लेता है
पापी, दुष्ट ,पाखंडी को
कड़ा दंड भी देता है
अपनी करनी भरनी पर
तुम भी सोच विचार करो
श्री राम की जय जयकार करो ।
काशी मथुरा अयोध्या को
त्रिलोक ने तीर्थ माना है
गंगा जमुना सरयू की
महिमा को खूब बखाना है
बैठ सभी उसकी नैया में
भवसागर को पार करो
श्री राम कीजयजयकारकरो।
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