ये निर्मोही बालम।
गोरी से ना खेलबा छछनी जिया हमार,
कहा कहां बाड़ा यार ये निर्मोही बालम।
बहे फगुनी बयार जब होला परेशानी,
माने ना ई बयार बैरी करे मनमानी ।
तड़पत बा जिया पिया यौवन हमार ये निर्मोही बालम।
कहा कहां बाड़ा यार ............।
सब कर पिया फागुन घरे चली अइले।
अबले ना अइला काहे हमके भूली गइला।
गदर मचल फागुन सगरो तोहरो इंतजार ये निर्मोही बालम ।
कहा कहां बाड़ा यार ..........।
अइबा जब घरवा सिंगार सोरहो हम करब।
सजी के दुआर इंतजार तोहरो हम करब।
चहकत बा परास फूली मगन संसार ये निर्मोही बालम।
कहा कहां बाड़ा यार..........।
अबकी पिया होलिया में रंगब तोहरो अंग अंग हो।
अबीर गुलाल मलब खेलब होली तोहरे संग संग हो।
केवन सौतनिया संग खेलेला फगुनी फुहार ये निर्मोही बालम।
कहा कहां बाड़ा यार ये परदेशी बालम।
गीतकार
श्याम कुंवर भारती (राजभर)
बोकारो , झारखंड
मॉब.9955509286
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