Ramakant Nigam
eSptdnosorlac4l1c40991iu41u519517uul1ua9ac98i07mh290g51f4mm1 ·आंखों की नींद
यादों की तितलियों बन
उड़ी....
साल दर साल
ठहरी रहती साथ तुम्हारे
दिलों के कैलेंडर
की फ़रवरी.....
…
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आंखों की नींद
यादों की तितलियों बन
उड़ी....
साल दर साल
ठहरी रहती साथ तुम्हारे
दिलों के कैलेंडर
की फ़रवरी.....
…

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