मानवीय गतिविधि व वर्षा का तांडव
****************************************** राजस्थान के अधिकांश जनपद आजकल बुरी तरह से बाढ से प्रभावित हैं। यह समाचार चौंकाने वाला है। राजस्थान का रेगिस्तान वाला भूभाग जो पानी की बूंद को तरसता था आज बाढ़ से डूबा हुआ है । पूर्वी हो या पश्चिमी राजस्थान सभी तरफ जल ही जल है । इस बार हो रही वर्षा ने पिछले सभी रिकार्ड ध्वस्त कर दिए हैं। मौसम वैज्ञानिकों की माने तो उनके अनुसार यह वर्षा मानसून के पैटर्न में बदलाव के कारण हो रहा है।
यह सब अचानक ही नहीं हो रहा है।मानव का प्रकृति के साथ छेड़छाड़ करना एक मुख्य कारण हो सकता है। उसकी विकास के नाम पर की जा रही गतिविधियों के दुष्परिणाम अब डरावने रूप में सामने आने लगे हैं । अंधाधुंध वनों की कटाई , खनिज पदार्थों,कोयला खनन प्राकृतिक संपदा, संसाधनों के अति दोहन से भूगर्भीय संरचना, विभिन्न अवयवों में पारस्परिक संतुलन प्रभावित हो रहा है ।जिसके विनाशकारी परिणाम अब सामने दिखाई देने लगे हैं । पर्वतीय क्षेत्रों , आस्था के केंद्रों को भी मनुष्य ने अपनी ऐष्णिक कामनाओं , आकांक्षाओं की पूर्ति , स्वार्थपरता के चलते नहीं बख्शा है । पर्यटन ,टूरिज्म को बढ़ावा देने, रोज़गार के अवसर बढ़ाने के नाम पर सड़को का निर्माण,मार्गो में सड़क के दोनों ओर जिस तरह से अवैज्ञानिक असंतुलित निर्माण किए जा रहे हैं, पहाड़ों को काटा गया और काटा जा रहा है उससे भी पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यावरण को गहरा नुकसान पहुंचा है ।इन क्षेत्रों में पहले से ही विद्युत परियोजनाओं, बांधों के निर्माण के अतिरिक्त औद्योगिक इकाइयों की स्थापना , भवन निर्माण जैसी अनेक गतिविधियों के कारण बड़ा नुकसान हो रहा है । सड़को को चौड़ा करने के लिए पहाड़ों की बेतहाशा कटाई, छटाई की जा रही है , इससे वृक्षों , हरित संपदा को गंभीर नुकसान पहुंचा। वर्षाकाल में पानी के तीव्र बहाव को रोकने का ये पेड़ पौधे महत्वपूर्ण कार्य करते हैं ।अब, जब हमने पहाड़ों के पेड़ों को काट दिया तो तेज बहाव से बेरोक टोक आता पानी मैदानी भागों में आते आते अनियंत्रित हो जाता है और यह पानी नदी नालों में न बहकर अचानक ही अपना मार्ग बदल नगरों ,ग्रामों में अपने वीभत्स रूप को दिखलाता हुआ तांडव मचा रहा है मानो कि वह मानव से अपने साथ की जा रही हिंसक क्रिया कलापों , गतिविधियों का बदला लेने को आतुर है ,मानो कि वह वह विकास के इस मॉडल पर आत्म मुग्ध होते मनुष्य को भावी गंभीरतम दुष्परिणामों की चेतावनी दे रहा है ।
यहां यह बतलाना भी प्रासंगिक होगा अब से लगभग पैंसठ वर्ष पूर्व हिंदी के तत्कालीन प्रसिद्ध साप्ताहिक में एक आलेख छपा था ।आलेख में लेखक ने भौगोलिक परिवर्तनों के विशद् अध्ययन व विश्लेषण के आधार पर निष्कर्ष निकाला था कि निकट भविष्य में ,चार पांच दशकों में ही राजस्थान जैसे रेगिस्तानी क्षेत्रों में अतिवृष्टि अर्थात खूब पानी बरसेगा।लेखक यहीं नहीं रुका ; आंकड़े व अध्ययन के आधार पर चेतावनी भी दी कि पंजाब,हरियाणा,पश्चिमी उत्तरप्रदेश के हरे भरे उपजाऊ इलाके बंजर होते चले जाएंगे ।
राकेश कौशिक
पूर्व प्रवक्ता एवम् जिला समन्वयक
राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस
मुजफ्फर नगर ।
यह सब अचानक ही नहीं हो रहा है।मानव का प्रकृति के साथ छेड़छाड़ करना एक मुख्य कारण हो सकता है। उसकी विकास के नाम पर की जा रही गतिविधियों के दुष्परिणाम अब डरावने रूप में सामने आने लगे हैं । अंधाधुंध वनों की कटाई , खनिज पदार्थों,कोयला खनन प्राकृतिक संपदा, संसाधनों के अति दोहन से भूगर्भीय संरचना, विभिन्न अवयवों में पारस्परिक संतुलन प्रभावित हो रहा है ।जिसके विनाशकारी परिणाम अब सामने दिखाई देने लगे हैं । पर्वतीय क्षेत्रों , आस्था के केंद्रों को भी मनुष्य ने अपनी ऐष्णिक कामनाओं , आकांक्षाओं की पूर्ति , स्वार्थपरता के चलते नहीं बख्शा है । पर्यटन ,टूरिज्म को बढ़ावा देने, रोज़गार के अवसर बढ़ाने के नाम पर सड़को का निर्माण,मार्गो में सड़क के दोनों ओर जिस तरह से अवैज्ञानिक असंतुलित निर्माण किए जा रहे हैं, पहाड़ों को काटा गया और काटा जा रहा है उससे भी पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यावरण को गहरा नुकसान पहुंचा है ।इन क्षेत्रों में पहले से ही विद्युत परियोजनाओं, बांधों के निर्माण के अतिरिक्त औद्योगिक इकाइयों की स्थापना , भवन निर्माण जैसी अनेक गतिविधियों के कारण बड़ा नुकसान हो रहा है । सड़को को चौड़ा करने के लिए पहाड़ों की बेतहाशा कटाई, छटाई की जा रही है , इससे वृक्षों , हरित संपदा को गंभीर नुकसान पहुंचा। वर्षाकाल में पानी के तीव्र बहाव को रोकने का ये पेड़ पौधे महत्वपूर्ण कार्य करते हैं ।अब, जब हमने पहाड़ों के पेड़ों को काट दिया तो तेज बहाव से बेरोक टोक आता पानी मैदानी भागों में आते आते अनियंत्रित हो जाता है और यह पानी नदी नालों में न बहकर अचानक ही अपना मार्ग बदल नगरों ,ग्रामों में अपने वीभत्स रूप को दिखलाता हुआ तांडव मचा रहा है मानो कि वह मानव से अपने साथ की जा रही हिंसक क्रिया कलापों , गतिविधियों का बदला लेने को आतुर है ,मानो कि वह वह विकास के इस मॉडल पर आत्म मुग्ध होते मनुष्य को भावी गंभीरतम दुष्परिणामों की चेतावनी दे रहा है ।
यहां यह बतलाना भी प्रासंगिक होगा अब से लगभग पैंसठ वर्ष पूर्व हिंदी के तत्कालीन प्रसिद्ध साप्ताहिक में एक आलेख छपा था ।आलेख में लेखक ने भौगोलिक परिवर्तनों के विशद् अध्ययन व विश्लेषण के आधार पर निष्कर्ष निकाला था कि निकट भविष्य में ,चार पांच दशकों में ही राजस्थान जैसे रेगिस्तानी क्षेत्रों में अतिवृष्टि अर्थात खूब पानी बरसेगा।लेखक यहीं नहीं रुका ; आंकड़े व अध्ययन के आधार पर चेतावनी भी दी कि पंजाब,हरियाणा,पश्चिमी उत्तरप्रदेश के हरे भरे उपजाऊ इलाके बंजर होते चले जाएंगे ।
राकेश कौशिक
पूर्व प्रवक्ता एवम् जिला समन्वयक
राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस
मुजफ्फर नगर ।
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